तर्क-ए-मोहब्बत - sad hindi shayari - Kuch dil se by sunil rana

तर्क-ए-मोहब्बत - sad hindi shayari




गर तर्क-ए-मोहब्बत मुझसे है
तो मेरे नाम से क्यूँ घबराते हो
जहाँ जिक्र हो मेरा महफिल मे
उस महफिल से क्यूँ उठ जाते हो ?

जब लोग तुम्हारी बस्ती के
मुझ पर पत्थर बरसाते हैं
तुम अपने महलों मे बैठे हुए
क्यूँ वहशत से भर जाते हो ?

तर्क-ए-मोहब्बत -    मोहब्बत का टूटा हुआ रिश्ता 

                 : - Sunil rana 

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