ye kaisi basti hai jahan insan nahin baste - Kuch dil se by sunil rana

ye kaisi basti hai jahan insan nahin baste

ये कैसी बस्ती है जहाँ
इंसान नहीं बस्ते 

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हिन्दू भी हैं , मुस्लिम भी हैं
हैं सिख भी और ईसाई भी 
ये कैसी बस्ती है जहाँ
इंसान नहीं बस्ते
ऐसे लोगों के दिलों मे तो
भगवान नही बस्ते I


लड़ते हैं धर्म के नाम पर
लहू बहाते हैं
मज़्लूमों और मासूमों की
लाशें भी गिराते हैं
रोते हैं और रूलाते हैं
नादान नहीं हँसते
ऐसे लोगों के दिलों मे तो
भगवान नही बस्ते I
गुरुग्रंथ साहिब , गीता ,कुरान
किसने हिँसा को सराहा है
सब साथ रहें , फूलें -फलें
हर मज़हब ने ये ही चाहा है
जो लिखा नहीं है ग्रंथों मे
किसने सिखलाया है तुमको
इन्सां -इन्सां मे भेद है क्या
किसने बतलाया है
बिना वजह अरे ओ दीवानो
यहाँ नाग नही डसते
ऐसे लोगों के दिलों मे तो
भगवान नही बस्ते I
सुनील राणा
Sunil Rana { 6 Oct 2015 }

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