Kabhi juda rahe kabhi saath rahe ( emotional shayari )
कभी जुदा रहे, कभी साथ रहे
कभी प्यार रहा
कभी प्यार नहीं
कैसे ये तेरे जज़्बात रहे ?
कभी हाल-ए-दिल
मै कह ना सका
कभी कहता रहा
तूने सुना नहीं
कभी हँस कर दिल का
दर्द पिया
कभी रोकर
बिरहा के आंसू
मै जिन्दा रहा
पर जिया नहीं ।
बरसों से
कोई आस नहीं है
बरसों से
लेकिन फिर भी यूँ लगता है
तू खफा है बस
कल -परसों से |
तू रूठी है
मन जाएगी
फिर बाहों में
आ जायेगी
ये बात अलग है
मेरी किस्मत में
फिर सावन की वो
बरसात नहीं ।



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