Poem for children - बाल कविता बरखा - Kuch dil se by sunil rana

Poem for children - बाल कविता बरखा

घुमड़ -घुमड़ कर बादल आए
अपने संग -संग बरखा लाए 
कड़क रही है बिजली रानी
रिमझिम -रिमझिम बरसा पानी 

आओ पिंकी , मुन्नी आओ
पानी मे सब दौड़ लगाओ
खेलो - कूदो नाचो गाओ 
जोर जोर से शोर मचाओ .....

 
Children-playing-with-paper-boat-in-the-rain

हरे - भरे सब पेड़ हुए हैं 
रंग - बिरंगे फूल खिले हैं 
कागज़ की एक नाव बनाओ 
चींटी चाची को बिठ्लाओ 

 नाच रही है तितली ताई 
चिड़या ने भी ताल मिलाई 
मेंढक चाचू गाते गाना 
कोई इनको भूल ना जाना

 

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