हमसे तर्क -ए- तआल्लूक का जिक्र ना करना कभी गैरों की महफ़िल में हमने तुम्हारी बेवफाई को ज़माने से छिपा रक्खा है हमने तो दिया जब भी तुम्हे करार ही दिया तुमने जो दिया दर्द वो दिल में दबा रक्खा है । ( तर्क -ए- तआल्लूक - टूटे हुए रिश्ते )
सुनील राणा ( 25 jan 2013 )
कोई टिप्पणी नहीं
Please do not enter any spam link in the comment box.
Leave a Comment